Kerala Chief Minister Congress
केरल में मुख्यमंत्री पद को लेकर विवाद क्यों बढ़ा? Kerala Chief Minister
बताएं कि कांग्रेस के VD सतीशन ने शीर्ष पद के लिए अपना रुख सख्त कर लिया है। NDTV के मुताबिक, सतीशन किसी भी दूसरे पद को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।
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रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व KC वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री पद के लिए आगे देख रहा है, जबकि सतीशन को वेणुगोपाल सरकार में अहम मंत्री की भूमिका देने पर विचार है।
VD सतीशन की दावेदारी क्यों मजबूत मानी जा रही है?
सतीशन को जनता की पसंद, IUML जैसे UDF सहयोगी दलों का समर्थन और लेफ्ट के खिलाफ लंबे समय से लड़ाई का चेहरा बताया जा रहा है। यही वजह है कि उनके समर्थक उन्हें CM पद का दावेदार मान रहे हैं।
केरल में कांग्रेस की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर खींचतान तेज हो गई है। Kerala Chief Minister Congress विवाद अब हाईकमान के लिए बड़ी परीक्षा बनता दिख रहा है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस नेता वीडी सतीशन ने साफ संकेत दिया है कि वे मुख्यमंत्री पद से कम किसी भूमिका को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। उनका रुख है—“मुख्यमंत्री या कुछ नहीं।”
रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाना चाहता है, जबकि वीडी सतीशन को नई सरकार में अहम मंत्रालय देने का विकल्प भी चर्चा में है। लेकिन सतीशन समर्थकों का कहना है कि वे लंबे समय से केरल में कांग्रेस का चेहरा रहे हैं और लेफ्ट सरकार के खिलाफ विपक्ष की लड़ाई में उनकी भूमिका मजबूत रही है। ऐसे में उन्हें दरकिनार करना पार्टी के लिए आसान नहीं होगा।
वीडी सतीशन की दावेदारी इसलिए भी मजबूत मानी जा रही है क्योंकि वे विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे हैं और राज्य की राजनीति में उनका जनाधार माना जाता है। UDF के कुछ सहयोगी दल, खासकर IUML, भी सतीशन को एक स्वीकार्य चेहरे के रूप में देखते हैं। दूसरी ओर, केसी वेणुगोपाल कांग्रेस संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं और राहुल गांधी के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं। यही वजह है कि हाईकमान उनके नाम पर गंभीरता से विचार कर रहा है। Kerala Chief Minister
इस पूरे मामले में राहुल गांधी की भूमिका बेहद अहम हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी ने केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और पूर्व प्रदेश अध्यक्षों की बैठक बुलाई है, ताकि मुख्यमंत्री पद पर सहमति बनाई जा सके। कांग्रेस नहीं चाहेगी कि सरकार गठन से पहले ही गुटबाजी खुलकर सामने आए।
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह विधायकों की राय, सहयोगी दलों की पसंद और केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति—तीनों को कैसे संतुलित करे। अगर केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो उन्हें विधानसभा उपचुनाव लड़ना पड़ सकता है। साथ ही उनकी लोकसभा सीट पर भी उपचुनाव की स्थिति बन सकती है, जिससे पार्टी पर अतिरिक्त चुनावी दबाव आएगा।
केरल का यह संकट कांग्रेस को कर्नाटक की याद भी दिला रहा है, जहां सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सत्ता-संतुलन लंबे समय तक चर्चा में रहा। कांग्रेस केरल में ऐसी स्थिति से बचना चाहेगी।
कुल मिलाकर, केरल में मुख्यमंत्री पद का फैसला सिर्फ एक नाम तय करने का मामला नहीं है। यह कांग्रेस की संगठनात्मक एकता, सहयोगी दलों के भरोसे और नई सरकार की स्थिरता से जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में राहुल गांधी और पार्टी हाईकमान का निर्णय यह तय करेगा कि केरल कांग्रेस एकजुट होकर सरकार चलाती है या अंदरूनी खींचतान उसकी शुरुआत को कमजोर करती है।
केरल CM पद पर कांग्रेस में सतीशन-वेणुगोपाल खींचतान तेज।
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