ममता बनर्जी
- Bengal SIR Supreme Court: ममता बनर्जी के दावे पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
- बंगाल चुनाव नतीजों पर SIR विवाद, सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
- SIR से बदले बंगाल चुनाव नतीजे? TMC के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट का जवाब
बंगाल SIR विवाद क्या है? ममता बनर्जी
बताएं कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद बड़ी संख्या में वोटर लिस्ट से नाम हटने का मुद्दा कैसे चुनावी विवाद बना।
TMC ने सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी? ममता बनर्जी
तृणमूल कांग्रेस का दावा समझाएं कि 31 सीटों पर वोटर नाम हटने का असर नतीजों पर पड़ सकता था। NDTV के मुताबिक, TMC ने कहा कि कई सीटों पर हटाए गए वोटरों की संख्या जीत-हार के अंतर से ज्यादा थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट की टिप्पणी शामिल करें कि जिन सीटों पर जीत का अंतर कम है और वोटर हटाए जाने से असर पड़ने की आशंका है, वहां प्रभावित पक्ष याचिका दाखिल कर सकता है।
बंगाल विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का असर चुनावी नतीजों पर पड़ा। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, बंगाल में SIR के बाद करीब 90.8 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए, जिस पर TMC ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ममता बनर्जी
तृणमूल कांग्रेस की ओर से सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने कोर्ट में कहा कि पार्टी ने 2021 में जिन 31 सीटों पर जीत हासिल की थी, उन सीटों पर इस बार हार हुई। उनका तर्क था कि इन सीटों पर हटाए गए वोटरों की संख्या कई जगह जीत-हार के अंतर से ज्यादा थी। एक उदाहरण देते हुए कहा गया कि एक सीट पर TMC उम्मीदवार सिर्फ 862 वोटों से हारे, जबकि वहां 5,000 से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल थे, ने कहा कि जहां जीत का अंतर बहुत कम है और हटाए गए वोटरों से नतीजे प्रभावित होने की आशंका है, वहां प्रभावित पक्ष चुनाव याचिका दाखिल कर सकता है। कोर्ट ने यह भी माना कि ऐसे मामलों में कानूनी रास्ता उपलब्ध है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने TMC के आरोपों को चुनौती दी। आयोग ने अपने आंकड़ों के आधार पर कहा कि जिन सीटों पर सबसे ज्यादा नाम हटाए गए, उनमें से कई सीटें TMC ने ही जीतीं। आयोग ने सुजापुर, रघुनाथगंज, समसेरगंज, रतुआ और सूती जैसी सीटों का उदाहरण दिया, जहां बड़ी संख्या में वोटर नाम हटे, लेकिन परिणाम TMC के पक्ष में रहा।
इस पूरे विवाद का राजनीतिक महत्व भी बड़ा है। बंगाल की 294 सीटों में BJP ने 207 सीटें जीतकर पहली बार राज्य में बड़ी चुनावी सफलता दर्ज की। चुनाव प्रचार के दौरान SIR, घुसपैठ और वोटर पहचान जैसे मुद्दे केंद्र में रहे। BJP ने TMC पर अवैध घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया, जबकि TMC ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए गरीब और हाशिए के मतदाताओं को वोटिंग प्रक्रिया से बाहर किया गया।
अब यह मामला सिर्फ चुनावी हार-जीत तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी उठाता है कि वोटर लिस्ट सुधार प्रक्रिया कितनी पारदर्शी होनी चाहिए और अगर किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से हटता है, तो उसे समय पर न्याय कैसे मिले। बंगाल SIR Supreme Court केस आने वाले दिनों में चुनावी पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों की बहस को और तेज कर सकता है। ममता बनर्जी
बंगाल SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। TMC ने वोटर नाम हटने से चुनाव नतीजे प्रभावित होने का दावा किया।
ममता बनर्जी